
बुरहानपुर ज़िले के हैदरपुर में जुलाई माह में मसीही विरोधियों द्वारा मसीही लोगों पर गंभीर उत्पीड़न किया गया। इस अन्याय के खिलाफ पीड़ितों ने एसपी, कलेक्टर, एसडीओपी, तथा अनुसूचित जनजाति आयोग दिल्ली तक न्याय की गुहार लगाई, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिणामस्वरूप परिस्थितियाँ जस की तस बनी हुई हैं।
न्याय की अनुपस्थिति ने मसीही विरोधियों के हौसले और बुलंद कर दिए हैं। हाल ही में धूलकोट सराय में ग्राम पंचायत द्वारा यह फैसला लिया गया कि —
• मसीही परिवारों को अपनी शादी में आमंत्रित न किया जाए,
• उनकी शादियों में शामिल न हुआ जाए,
• उनसे किसी भी प्रकार का सामाजिक संबंध न रखा जाए,
• उनके घरों में बैठने तक की मनाही हो।
यह निर्णय मसीही समाज के खिलाफ पूर्ण सामाजिक बहिष्कार की घोषणा है।
इसके अतिरिक्त, कल रविवार को बुरहानपुर के पास एक गाँव गारबर्डी में चल रही प्रार्थना सभा में भी कुछ लोग और सरपंच विरोध करने पहुँच गए। उनके खिलाफ निंबोला पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कर दी है.
विश्वसनीय सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि सात गाँवों के लोग एकजुट होकर इसी प्रकार की विरोधी गतिविधियों को और बड़े स्तर पर अंजाम देने की योजना बना रहे हैं।
यह सब घटनाएँ एक गंभीर प्रश्न खड़ा करती हैं —
👉 आखिर मसीही समाज के खिलाफ इतना विरोध क्यों?
👉 क्या हमारे देश के संवैधानिक अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता केवल कागज़ों तक सीमित हैं?
अब मसीही समाज को जागने की जरूरत है। सिर्फ “प्रार्थना करेंगे ,यह बायबल में लिखा है ,यह अंत का समय है ” का बहाना बनाना अब बंद कर के संवैधानिक न्याय के लिए खडे होने का समय आ गया है. Uicf (United Indian Christian Forum) संघटन को मजबूत बनाये. अब चुप बैठने समय नहीं है. सब एक बने. अपने मतभेद, पंथभेद सब बाजू रखे. इतना समझे हम सभी मसीही भाई बहन हैं. हम सब परमेश्वर की संतान है।


बुरहानपुर ज़िले में मसीही समाज पर बढ़ते अत्याचार">








