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चर्च में पास्टर की और विश्वासीयोंकी भूमिका

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Written by
Chavan

चर्च में पास्टर की भूमिका

पास्टर केवल एक धार्मिक नेता नहीं, बल्कि एक चरवाहा (Shepherd) है जो अपने झुंड (विश्वासियों) की देखभाल करता है। उसका कार्य और जिम्मेदारी बाइबल आधारित होती है।

१. पास्टर के कार्य (Responsibilities of a Pastor)

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• वचन की शिक्षा और प्रचार

• पास्टर का मुख्य दायित्व है परमेश्वर का वचन सिखाना और मंडली को आत्मिक रूप से बढ़ाना।

• (२ तिमुथियुस ४:२ – वचन का प्रचार कर।)

• आत्मिक देखभाल (Spiritual Care)

• बीमारों के लिए प्रार्थना करना, जरूरतमंदों को सांत्वना देना, और टूटे दिल वालों को संभालना।

• (याकूब ५:१४ – कोई बीमार हो तो पास्टर को बुलाओ।)

• चरवाहे की तरह मार्गदर्शन (Shepherding)

• पास्टर विश्वासियों को सही मार्ग पर ले जाता है, गलतियों से रोकता है और परमेश्वर की इच्छा बताता है।

• (यूहन्ना १०:११ – मैं अच्छा चरवाहा हूँ।)

• नेतृत्व और प्रशासन (Leadership & Administration)

• चर्च के कार्यों को व्यवस्थित करना, सेवकों को जिम्मेदारियाँ देना और सबको संगठित करना।

• प्रार्थना और मध्यस्थता (Prayer & Intercession)

• मंडली और समाज के लिए निरंतर प्रार्थना करना।

• उदाहरण बनना (Being a Role Model)

• पास्टर का जीवन ही सबसे बड़ी शिक्षा है। उसका चरित्र, परिवार और व्यवहार मंडली के लिए आदर्श होना चाहिए।

२. विश्वासियों के कार्य (Responsibilities of Believers)

• आज्ञाकारिता और सम्मान (Obedience & Respect)

• विश्वासियों को अपने पास्टर की शिक्षा और मार्गदर्शन को मानना चाहिए।

• (इब्रानियों १३:१७ – अपने अगुवों की आज्ञा मानो।)

• सहयोग और सहभागिता (Cooperation & Participation)

• चर्च की सेवाओं, कार्यों और प्रचार में सक्रिय रहना।

• प्रार्थना में पास्टर को उठाना (Uplift Pastor in Prayer)

• मंडली को पास्टर और उसके परिवार के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

• आर्थिक समर्थन (Financial Support)

• दशमांश, भेंट और सेवाओं से पास्टर तथा चर्च की जरूरतें पूरी करनी।

• एकता और प्रेम (Unity & Love)

• मंडली आपस में एकता रखे और पास्टर के साथ सहयोग करे।

• जीवन में फल लाना (Bearing Fruit)

• पास्टर की शिक्षा को सुनकर जीवन में लागू करना और आत्मिक फल लाना।

निष्कर्ष

 चर्च तभी स्वस्थ और मजबूत बन सकता है जब पास्टर अपनी बुलाहट के अनुसार चरवाहे की तरह कार्य करे, और विश्वासी अपने दायित्व के अनुसार सहयोग करें।

पास्टर बिना विश्वासियों के अधूरा है, और विश्वासी पास्टर के बिना दिशाहीन हो सकते हैं।

 

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