
विश्वास कमजोरी नहीं, बल्कि शक्ति है” — जेमिमा रोड्रिग्स के मामले से सीखने योग्य बातें
भारत की उभरती हुई क्रिकेट खिलाड़ी जेमिमा रोड्रिग्स ने हाल ही में एक भावनात्मक बयान दिया।
वह बोलीं —
“सबसे पहले मैं यीशु का धन्यवाद करती हूँ, क्योंकि मैं यह खुद नहीं कर सकती थी। उन्होंने मुझे आज तक संभाला है…”
बस इतना कहते ही, सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने उसे उसके “ख़्रिस्ती होने” के कारण ट्रोल करना शुरू कर दिया।
यह सिर्फ़ जेमिमा का मामला नहीं है — यह “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक स्वतंत्रता” का मामला है।
अपने विश्वास को व्यक्त करना गुनाह नहीं
भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है।
हमारे संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 हर नागरिक को यह अधिकार देते हैं कि —
“वह अपने धर्म को मान सके, उसका पालन कर सके और उसका प्रचार कर सके।”
तो फिर अगर जेमिमा ने अपने ईश्वर पर विश्वास और कृतज्ञता व्यक्त की,
तो उसमें गलत क्या है?
हमने कई खिलाड़ियों को यह कहते सुना है —
“अल्लाह का शुक्रिया,” “भगवान का आशीर्वाद,” “वाहेगुरु जी का खालसा,” “जय श्रीराम” —
और किसी को इससे परेशानी नहीं होती।
तो फिर अगर जेमिमा ने कहा कि — “मैं यीशु का धन्यवाद करती हूँ,”
तो क्या केवल इसलिए उसे “विवादास्पद” ठहराया जाएगा?
यह सवाल हर भारतीय नागरिक को खुद से पूछना चाहिए।
उसके विश्वास ने उसे दिया आंतरिक बल
जेमिमा केवल एक बेहतरीन खिलाड़ी नहीं, बल्कि संघर्ष, विनम्रता और दृढ़ता की प्रतीक है।
वह कहती हैं —
“पिछले चार महीने बहुत कठिन थे, लेकिन मेरा सपना अभी पूरा नहीं हुआ है।”
उसकी यह दृढ़ता और आत्मबल उसके विश्वास से आता है।
विश्वास किसी भी रूप में हो —
चाहे ईश्वर में, खुद में, या किसी सिद्धांत में —
वह इंसान को टूटने से बचाता है और आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
समाज को अपनी दृष्टि बदलनी होगी
आज के समय में सोशल मीडिया पर अपनी राय देना भी एक “जोखिम” बन गया है।
हम भूल जाते हैं कि धर्म व्यक्तिगत अनुभव है, प्रतियोगिता नहीं।
जेमिमा के विश्वास का सम्मान करना,
दरअसल भारत की आत्मा — “विविधता में एकता” का सम्मान करना है।
अंतिम विचार
जेमिमा ने जो कहा, वह उसकी व्यक्तिगत अनुभूति और कृतज्ञता थी।
उसने किसी का अपमान नहीं किया, न किसी पर धर्म थोपने की कोशिश की।
उसने केवल अपने परमेश्वर को धन्यवाद दिया।
उस पर ट्रोल करना, दरअसल स्वतंत्रता पर प्रहार है।
आज हमें — युवाओं को, पत्रकारों को, समाज को —
इस घटना से यह सीखना चाहिए कि
“विश्वास इंसान को विभाजित नहीं करता, वह जोड़ता है।”
📰 लेखक : संपादकीय विभाग, PM News India
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