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ओडिशा में पादरी पर भीड़ का हमला

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Written by
Chavan

PM News India Special Report — ओडिशा में पादरी पर भीड़ का हमला: 

  1. Dhenkanal, Odisha — जनवरी की चार तारीख़ में ओडिशा के धेंकानाल जिले के Parjang गांव में एक गंभीर घटना सामने आई, जिसमें एक मसीही पादरी बिपिन बिहारी नाइक और उनके परिवार के साथ एक भीड़ द्वारा हिंसा की गई।

क्या हुआ था?

4 जनवरी 2026 को पादरी बिपिन बिहारी नाइक अपने घर में प्रार्थना सभा के दौरान परिवार और कुछ अन्य विश्वासियों के साथ थे। तभी लगभग 15-20,( कुछ न्यूज पेपर में 40) लोगों की एक भीड़ वहां पहुँची।

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भीड़ ने पादरी और अन्य लोगों पर हमला किया, उन्हें ज़ोर-ज़बरदस्ती घर से बाहर खींचा और मारपीट की।

उनके चेहरे पर सिंदूर लगाया गया, चप्पलों की माला पहनाई गई, और उन्हें गाँव में घुमाया गया।

आरोप लगाया गया कि भीड़ ने उन्हें दुर्गंधयुक्त पानी पीने को मजबूर किया और कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार गोबर खाने पर भी मजबूर किया गया और “जय श्री राम” के नारे लगवाए गए।

पुलिस की प्रारंभिक जांच और एफआईआर में कुछ विवरण — जैसे कि नाले का पानी पिलाना या गोबर खाने पर मजबूर करना — अभी तक स्पष्ट रूप से सबूत-आधारित नहीं पाये गए। अधिकारियों का कहना है कि जांच जारी है और मामले की पुष्टि के लिए सबूत जुटाये जा रहे हैं।

पुलिस की कार्रवाई और स्थिति

घटना की शिकायत पादरी की पत्नी के द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी गई थी, जिसके बाद एफआईआर दर्ज की गई और अब तक 9 लोगों को हिरासत में लिया गया है जो पूछताछ के लिए रिमांड पर हैं।

पुलिस अधिकारी ने कहा है कि कुछ बयान और दावे अभी एफआईआर में शामिल नहीं हैं और जांच के दौरान ही दोषियों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई की जाएगी।

समाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

राज्य और राष्ट्रीय नेताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और इसे धार्मिक आज़ादी के अधिकार के खिलाफ बताया है।

Meghalaya के मुख्यमंत्री ने इसे संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन बताया और आरोपी पर कार्रवाई की माँग की है।

कई राजनीतिक दलों ने सरकार पर “जंगलराज” और सांप्रदायिक हिंसा के आरोप भी लगाए हैं।

मामले का बड़ा संदर्भ

यह घटना सिर्फ़ एक व्यक्ति पर हमला नहीं है, बल्कि धार्मिक अल्पसंख्यों के संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ उठते खतरे का उदाहरण भी बन रही है — जहाँ बिना सबूत के “धर्मांतरण” जैसे आरोपों का उपयोग भीड़ द्वारा हिंसा का justification बनाने के लिए किया गया।

निष्कर्ष:

पादरी पर हमला — जिसमें उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित और पीटा गया — ने देशभर में चिंता जगाई है। पुलिस जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई होने की उम्मीद है। इस घटना ने मसीही समुदाय और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यों के सुरक्षा और स्वतंत्रता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

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