
मारपीट का शिकार बने मसीही पास्टर पर ही दर्ज हुई FIR, न्याय प्रक्रिया पर उठे सवाल
गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में भर्ती रहे पास्टर; समर्थकों का आरोप – “पीड़ित को ही बनाया गया आरोपी”
थाना पिपलोद, जिला खण्डवा, मध्यप्रदेश के रायपुर ग्राम की घटना.
रिपोर्ट: PM News India संवाददाता
खंडवा जिले के एक ग्रामीण क्षेत्र में धार्मिक तनाव से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें एक मसीही पास्टर पर धर्मांतरण के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, पास्टर के समर्थकों और परिजनों का कहना है कि वे स्वयं हिंसा का शिकार हुए और उन्हें गंभीर चोटों के कारण अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार,नवलसिंग दमडिया और रमेश बारेला दोनों रिस्तेदार है. फूई और मामा का लडका. सप्ताह में एक दिन वे अपने घर में प्रार्थना करने बैठते हैं. उस दिन भी प्रार्थना कर रहे थे. पड़ोसी भाई दशरथ लोहार भी आया था, और घर के सभी सदस्य, नवलसिंग के दो लडके और दो बहुये थी. समय रात के 9 बजे थे. उस समय गाव के किशोर संतोष बंजारा कुछ लोगों को लेकर नवलसिंग के घर में जबरदस्ती से घुस गये और धर्मांतरण मुद्दा बनाकर अशोभनीय, गंदी गंदी गालियां दी. जब रमेश उनसे पूछने लगा कि हमने क्या गुनाह किया और आप गालियां दे रहे हैं? और जबरदस्ती हमारे घर मे घुस आये हो? तभी रमेश को लाथ घुस्सोंसे मारना शुरू कर दिया. सभी बीच बचाव करते रहे लेकिन रमेश को जादा मार पडी वह बेहोश हो गया उसे जिला सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया. वह उसी हालत में 2 दिन तक रहा. उसको अंदरूनी चोटे आई है. वैसे सभी को मार पड़ी हैं. लेकिन रमेश को जादा है.
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, वे 3–4 दिनों तक उपचाराधीन रहे। परिजनों का आरोप है कि इलाज भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं रहा।
FIR में क्या दर्ज हुआ?
पुलिस द्वारा दर्ज FIR में पास्टर सहित अन्य व्यक्तियों पर विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर विधि अनुसार कार्रवाई की गई है और जांच जारी है।
हालांकि, समर्थकों का कहना है कि “जो व्यक्ति खुद घायल होकर अस्पताल में भर्ती रहा, उसी को आरोपी बना दिया गया, जबकि मारपीट करने वालों के खिलाफ समान कार्रवाई नहीं दिख रही।”
कानूनी विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
कानूनी जानकारों का कहना है कि:
• किसी भी आरोप की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
• यदि मारपीट हुई है, तो मेडिकल रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर सभी पक्षों की भूमिका स्पष्ट होनी चाहिए।
• कानून के समक्ष सभी समान हैं, और पीड़ित एवं आरोपी की स्थिति तथ्यों के आधार पर तय होनी चाहिए।
प्रशासन का पक्ष
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी के साथ अन्याय हुआ है, तो जांच में तथ्य सामने आने के बाद आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
सामाजिक प्रभाव
इस घटना ने क्षेत्र में चर्चा और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। स्थानीय सामाजिक संगठनों का कहना है कि धार्मिक मामलों में तनाव से बचने के लिए संवाद और शांति बनाए रखना आवश्यक है।
देखते हैं अब आगे जांच में क्या सिद्ध होता है? सही न्याय होता है या हमेशा की तरह पीड़ित व्यक्ति को ही गुनहगार बनाया जाता है? वैसे तो न्याय व्यवस्था पर भरोसा है जांच पड़ताल करने के बाद मे जो आरोपी हैं उन्हें ही सजा मिलेगी।










